खूबसूरत गुड नाईट शायरी 2 लाइन

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Heart Touching खूबसूरत गुड नाईट शायरी 2 लाइन

दिन भर की थकान सुकून में बदल जाए,
हसीन ख्वाबों की दुनिया आपको गले लगाए।

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तेरी मीठी नींदों पे, मेरा हर ख़्वाब क़ुर्बान,
जल्दी से सो जा, ओ मेरे दिल की पहचान।

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कल की फ़िक्र मत करो, ये रात है सोने के लिए,
ख़ुद को तरोताज़ा कर लो, एक नई सुबह के लिए।

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हवाओं की सरगम कानों में लोरी सुनाए,
आपकी थकी पलकों को नींद प्यारी आए।

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नींद की गोद में अब सिर रख दो,
थकान के हर ग़म को दूर कर दो।

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दूर होकर भी, तुम पास होते हो,
मेरे हर एहसास में, ख़ास होते हो।

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चाँद की चाँदनी आपको सुला दे,
ख्वाबों में खुशियों की बौछार लगा दे।

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दिल की हर एक बात को, अब कह दो अलविदा,
आराम करो प्यारे, ये रात है महफ़िल-ए-ख़ुदा।

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गर्लफ्रेंड के लिए ख़ूबसूरत गुड नाइट शायरी 2 लाइन (Khubsurat Good Night Shayari for Girlfriend)

फूलों सी महक आपके ख्वाबों में आए,
हर सपना खुशियों की सौगात बन जाए।

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नींद की चादर ओढ़ लो आराम से,
ख्वाब सजाओ अपने अरमान से।

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चाँदनी छू ले आपकी पलकों को,
नींद ले जाए आपको मीठे सपनों को।

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आज का दिन गया, कल एक नई शुरुआत है,
सो जाओ अब चुपचाप, यही सबसे अच्छी बात है।

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नींद का हर पल सुकून दे आपको,
ख्वाबों का हर लम्हा ख़ुशी दे आपको।

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मेरे हर ख़्वाब में, बस तेरी आहट हो,
ये प्यारी सी रात, तेरी ही चाहत हो।

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ये रात है सुहानी, ख़ामोशी में डूब जाओ,
मेरी बाहों के तकिये पर, तुम चैन से सो जाओ।

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Hindi खूबसूरत गुड नाईट शायरी 2 लाइन

रात की गहराई में, बस तेरा ख्याल रहे,
तू जहाँ भी रहे, मेरा प्यार तेरे साथ रहे।

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ये खूबूसरत रात आई है सपनों के कारवां के साथ,
अब जल्दी सो जाओ इस प्यारे से गुड नाईट के साथ।

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सितारों की चादर ओढ़, चैन से सो जाना,
सुबह फिर मिलेंगे, ये वादा याद रखना।

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दिन की थकान रात के सुकून से मिट जाए,
ख्वाबों में आपकी दुनिया और भी खिल जाए।

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चाँद की चाँदनी आपको थपकी दे जाए,
ख्वाबों भरी नींद आपको पप्पी दे जाए।

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सपनों के शहर में, बस तू ही तू नज़र आए,
गुड नाईट मेरी जान, दुआ है नींद अच्छी आए।

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दिन भर की थकान अब, आँखों से दूर करो,
इस प्यारी रात की ख़ामोशी को क़ुबूल करो।

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तारे झिलमिलाएं आपको सुलाने के लिए,
ख्वाब आए सिर्फ मुस्कान दिलाने के लिए।

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Romantic खूबसूरत गुड नाईट शायरी 2 लाइन

सोने से पहले आज फिर आँखों ने तेरी तस्वीर बनाई है,
अब जल्दी सो जाओ, मुझे बहुत गहरी नींद आई है।

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सितारों से दुआ है कि आपको नींद प्यारी आए,
आपके ख्वाबों में जहां की सारी खुशियाँ समा जाए।

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ये चाँद करेगा निगरानी आपकी सारी रात,
तारे देंगे खुशियों की आपको प्यारी सी सौगात।

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ये सर्द रात ये आवारगी ये नींद का बोझ
हम अपने शहर में होते तो घर गए होते

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जब तक न मिलोगे, चैन नहीं आएगा,
बस इसी उम्मीद में, ये दिल सो जाएगा।

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इक रात वो गया था जहाँ बात रोक के
अब तक रुका हुआ हूँ वहीं रात रोक के

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रात तो वक़्त की पाबंद है ढल जाएगी
देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है

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दोस्त खूबसूरत गुड नाईट शायरी 2 लाइन

इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई
हम न सोए रात थक कर सो गई

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शब-ए-विसाल है गुल कर दो इन चराग़ों को

ख़ुशी की बज़्म में क्या काम जलने वालों का

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हर एक रात को महताब देखने के लिए
मैं जागता हूँ तिरा ख़्वाब देखने के लिए

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कुछ भी बचा न कहने को हर बात हो गई

आओ कहीं शराब पिएँ रात हो गई

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रात को जीत तो पाता नहीं लेकिन ये चराग़
कम से कम रात का नुक़सान बहुत करता है

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बहुत दिनों में मोहब्बत को ये हुआ मा’लूम

जो तेरे हिज्र में गुज़री वो रात रात हुई

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इक उम्र कट गई है तिरे इंतिज़ार में

ऐसे भी हैं कि कट न सकी जिन से एक रात

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रात आ कर गुज़र भी जाती है
इक हमारी सहर नहीं होती

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ऐ रात मुझे माँ की तरह गोद में ले ले

दिन भर की मशक़्क़त से बदन टूट रहा है

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हम तो रात का मतलब समझें ख़्वाब, सितारे, चाँद, चराग़
आगे का अहवाल वो जाने जिस ने रात गुज़ारी हो

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रात को रात कह दिया मैं ने

सुनते ही बौखला गई दुनिया

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इश्क़ के शोले को भड़काओ कि कुछ रात कटे

दिल के अंगारे को दहकाओ कि कुछ रात कटे

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ये तन्हा रात ये गहरी फ़ज़ाएँ
उसे ढूँडें कि उस को भूल जाएँ

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पहले नहाई ओस में फिर आँसुओं में रात

यूँ बूँद बूँद उतरी हमारे घरों में रात

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आज की रात भी तन्हा ही कटी
आज के दिन भी अंधेरा होगा

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लोग कहते हैं रात बीत चुकी

मुझ को समझाओ! मैं शराबी हूँ

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हर तरफ़ थी ख़ामोशी और ऐसी ख़ामोशी
रात अपने साए से हम भी डर के रोए थे

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हमारे ख़्वाब चोरी हो गए हैं

हमें रातों को नींद आती नहीं है

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रात को रोज़ डूब जाता है
चाँद को तैरना सिखाना है

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अभी रात कुछ है बाक़ी न उठा नक़ाब साक़ी

तिरा रिंद गिरते गिरते कहीं फिर सँभल न जाए

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रात क्या सोए कि बाक़ी उम्र की नींद उड़ गई
ख़्वाब क्या देखा कि धड़का लग गया ताबीर का

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रात की बात का मज़कूर ही क्या

छोड़िए रात गई बात गई

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मैं सोते सोते कई बार चौंक चौंक पड़ा

तमाम रात तिरे पहलुओं से आँच आई

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मिरी नज़र में वही मोहनी सी मूरत है
ये रात हिज्र की है फिर भी ख़ूब-सूरत है

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कुछ दूर तक तो चमकी थी मेरे लहू की धार
फिर रात अपने साथ बहा ले गई मुझे

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नींद ऐसी कि रात कम पड़ जाए

ख़्वाब ऐसा कि मुँह खुला रह जाए

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था व’अदा शाम का मगर आए वो रात को
मैं भी किवाड़ खोलने फ़ौरन नहीं गया

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हिचकियाँ रात दर्द तन्हाई

आ भी जाओ तसल्लियाँ दे दो

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तन्हाई के लम्हात का एहसास हुआ है
जब तारों भरी रात का एहसास हुआ है

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आज न जाने राज़ ये क्या है

हिज्र की रात और इतनी रौशन

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हम फ़क़ीरों का पैरहन है धूप
और ये रात अपनी चादर है

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काश कोई हम से भी पूछे
रात गए तक क्यूँ जागे हो

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चाँद भी निकला सितारे भी बराबर निकले

मुझ से अच्छे तो शब-ए-ग़म के मुक़द्दर निकले

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मौत बर-हक़ है एक दिन लेकिन
नींद रातों को ख़ूब आती है

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सुब्ह तक कौन जियेगा शब-ए-तन्हाई में
दिल-ए-नादाँ तुझे उम्मीद-ए-सहर है भी तो क्या

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बड़ी ही कर्बनाक थी वो पहली रात हिज्र की
दोबारा दिल में ऐसा दर्द आज तक नहीं हुआ

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रात आ जाए तो फिर तुझ को पुकारूँ या-रब
मेरी आवाज़ उजाले में बिखर जाती है

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ख़्वाबों से न जाओ कि अभी रात बहुत है

पहलू में तुम आओ कि अभी रात बहुत है

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आँखों को सब की नींद भी दी ख़्वाब भी दिए
हम को शुमार करती रही दुश्मनों में रात

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शब के सन्नाटे में ये किस का लहू गाता है
सरहद-ए-दर्द से ये किस की सदा आती है

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बस इतनी सी बात थी उस की ज़ुल्फ़ ज़रा लहराई थी
ख़ौफ़-ज़दा हर शाम का मंज़र सहमी सी हर रात मिली

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हिज्र में मिलने शब-ए-माह के ग़म आए हैं
चारासाज़ों को भी बुलवाओ कि कुछ रात कटे

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उम्र भर की तल्ख़ बेदारी का सामाँ हो गईं
हाए वो रातें कि जो ख़्वाब-ए-परेशाँ हो गईं

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